उमरिया- चैत्र बंंसतीय नवरात्रि की भव्यता बढाने के लिए तहसील परिसर में एक आवश्यक बैठक आयोजित की गयी, बैठक में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मीनाक्षी इंगले की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में बिरासनी जवारा जुलुस की भव्यता बढाने पर जोर दिया गया। दर असल में एक लंबे समय से माता के दरबार में श्रद्धालु जवारा कलश बोते तो है, लेकिन उठाने नहीं आते, जिससे धीरे धीरे बिरासनी जवारा जुलुस का अस्तित्व ही संकट मे पडता जा रहा है, इसलिए सभी श्रद्धालुओं को कलश उठाने के लिए प्रेरित किया जाये। इसके लिए सबसे प्रेरणा के लिए अनुविभागीय अधिकारी मीनाक्षी इंगले ने खुद कलश लेकर चलने की बात कही गयी जिसकी बैठक के सभी सदस्यों ने स्वागत किया, साथ ही पाली नगर की सभी महिला मंडल, रामायण मंडलियों की महिलाओं से भी बैठक कर कलश उठाने के लिए प्रेरित करने की कोशिश अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने स्वयं उठायी। बिरासनी मंदिर में पंडितों से बैठकी वसूली पर लेकर जबर्दस्त बहस हुई और नगर के बहु प्रतिष्ठित व्यवसायी और व्यापारी संघ के संरक्षक गोपाल अग्रवाल ने इस बात का कडा विरोध जताते हुए कहा कि इस जरा सी आमदनी के लिए विवाद की स्थिति बनती है।अगर पंडितों से बैठकी वसूली जाती है, तो सभी लोगों से शुल्क लिया जाना चाहिए , चाहे वह रक्षा सूत्र बांधने वाला हो, सभी से वसूल किया जाये। बैठक में तीखी बहस के कारण पंडितों से वसूली जाने वाली राशि 1100 से घटाकर पांच सौ रूपये लिये जाने का निर्णय लिया गया। विदित होवे की पिछली बार भी बैठक में पांच सौ रूपये का निर्णय पारित किया गया था, लेकिन 1100 रूपये वसूल किया गया था। इस बात को भी प्रमुखता से रखा गया। बैठक में क्रय होने वाली सामग्री बांडेड कंपनी को ही निविदा में रखा जाये, घी कलश के मूल्य वृद्धि पर भी बैठक में दर न बढाने का निर्णय लिया गया। जानकर सूत्रों ने बताया कि घी कलशो में कहीं कोई नुकसान नहीं है तो मुनाफा कमाने के लिए दरो में वृद्धि नहीं की जानी चाहिए। इस प्रकार बैठक में उठाये गये सभी मुद्दों में तार्किक और विधिवत समीक्षात्मक चर्चा कर निर्णय लिया गया।
बिरासनी जवारा जुलुस की भव्यता बढाने बैठक, पंडितों से शुल्क लेने पर उभरे मतभेद