गिलियन-बैरे सिंड्रोम बीमारी से जंग जीतकर घर लौटा दस वर्षीय बालक

शहडोल- जिले के ब्यौहारी क्षेत्र से आए एक दस वर्षीय बच्चे ने गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर तंत्रिका संबंधी बीमारी को मात देकर नई जिंदगी पाई है। उसके परिवार के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, जब बच्चे को अचानक हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होने लगी। महज दो दिनों में हालत इतनी बिगड़ गई कि वह खड़ा होने और चलने में असमर्थ हो गया। परिजनों ने तत्काल उसे बिरसा मुंडा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, शहडोल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती के समय बच्चे की  जांच में पुष्टि हुई कि वह गिलियन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित है। इलाज के शुरुआती दिनों में बच्चे की हालत और बिगड़ गई। कमजोरी इतनी बढ़ गई कि वेंटिलेटर की आवश्यकता की आशंका बनने लगी। यह समय परिवार और चिकित्सकीय टीम—दोनों के लिए बेहद कठिन था। हालांकि समय पर दी गई दवाओं, सतत निगरानी और विशेषज्ञ उपचार का असर दिखने लगा। कुछ ही दिनों में स्थिति स्थिर हुई और धीरे-धीरे सुधार शुरू हुआ। करीब 15 दिन तक आईसीयू में रखने के बाद बच्चे को सामान्य वार्ड में शिफ्ट किया गया। वहां एक सप्ताह तक दवाओं के साथ नियमित फिजियोथेरेपी कराई गई। धीरे-धीरे उसकी मांसपेशियों में ताकत लौटने लगी और वह फिर से चलने-फिरने लगा। अंततः बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका।

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