अनूपपुर/पण्डित पुष्पेन्द्र उरमलिया।
अगर बाप जिंदा है तो बाजार के हर खिलौने अपने…………जैसा चाहे वैसा खेलो, बस पूरे करो हर सपने… उक्त कहावत को चरितार्थ करके लोक धन के करीब अरबो रुपए स्वाहा कर चुकी और वित्तीय अनियमितताओं की आदी हो चुकी नगरपालिका परिषद बिजुरी का एक नया मामला सामने आया है जिसे लेकर नगर में तरह-तरह की बातें आज बिजुरी नगर के दौरे पर सुनी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भर्ती किए जाने वाले आउटसोर्स कर्मचारीवर्ग का नगरपालिका बिजुरी में टेंडर जबलपुर की किसी पार्टी के पास है। उक्त ठेकेदार के साथ मिलकर नगर पालिका ने तमाम चहेतो एवं पार्षदों के चहतों का कल्याण कर दिया है। समाचार तो यह भी प्राप्त हुआ है कि इसमें पार्षदों के कुछ परिजन भी शामिल हैं। बताया जाता है कि स्थापना शाखा प्रभारी सुदामा पाण्डेय ज़ी की विशेष दया से नगरपालिका परिषद बिजुरी के करीब 02 दर्जन से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी जिनका बाकायदा मानदेय या पगार नगरपालिका बिजुरी के कार्यालय से प्रतिमाह घर बैठे खातों में जा रहा है किंतु वे कर्मचारी किस-किस कार्य में संलग्न है इसका जवाब न परिषद के पास है ना मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के पास है यहां तक की पुलिस विभाग से साइबर सेल की सहायता लेकर उक्त कर्मचारियों का मोबाइल नंबर लोकेशन तस्दीक किया जाना अति आवश्यक है कि नगरपालिका में भर्ती दिख रहे उक्त आउटसोर्स कर्मचारी मध्यप्रदेश के किस-किस जिले में कहां-कहां और किस-किस कार्य में संलग्न हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि अधिकांश कर्मचारी इंदौर, जबलपुर, कटनी, मंडला-डिंडोरी क्षेत्र में अपने निजी कार्य पर लगे हुए हैं किंतु बिजुरी नगर के सरकारी खजाने की चौकीदारों द्वारा वित्तीय अनियमित करते हुए बकायदा उनके खातों में पैसे भेजे जा रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि उक्त धांधली में जबलपुर का कोई ठेकेदार भी शामिल है जिसे बकायदा चुप रहने की कीमत मिल रही है और इस प्रकार से जहां एक और अवैध घटिया निर्माण कार्य खरीदी और एक ही फाइल का बार-बार भुगतान करने के विवाद से नगर पालिका बिजुरी घिरी हुई है वैसे ही आउटसोर्स कर्मचारी के मामले में भी पर्याप्त धांधली हो रही है।
खातों में ऐसा लेनदेन करने के लिए ही ऑनलाइन फंड ट्रांसफर का खेल सतना से आए बेहद चालाक दैनिक वेतनभोगी मजदूर से कराया जा रहा है और शासन के द्वारा पदस्थ लेखापाल केवल औपचारिकता के लिए कागजों में कलम घिसते हुए बैठे हैं जिन्हें कंप्यूटर चालू-बंद करना भी नहीं आता। पूरा खेल दैनिक वेतनभोगी द्वारा किया जा रहा है क्योंकि यह अधिकांश घोटाले का राजदार है और राजदार का मुंह ना खुल जाए इसलिए फंड ट्रांसफर का कार्य दैनिक वेतनभोगी से कराया जा रहा है।