मप्र के ऐतिहासिक नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप चोरी, जांच में जुटी पुलिस

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला स्थित भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की ऐतिहासिक स्थली नरवर किले से लगभग 400 साल पुरानी तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। वहीं, राज्य पुरातत्व विभाग ने किले का दौरा करने की बात कही है। करैरा के सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) प्रशांत शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि घटना बुधवार/गुरुवार की दरमियानी रात की है। करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश किले के पिछले रास्ते से लोडिंग वाहन लेकर घुसे और पहरा दे रहे सुरक्षाकर्मियों को खदेड़कर 16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप लूट ले गए। उन्होंने बताया कि 10वीं सदी में कछवाहा राजपूतों द्वारा पुनर्निर्मित माने जाने वाले इस किले में मूल रूप से 14 ऐतिहासिक तोपें थीं, जिनमें से 13 अभी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है, जिसमें अंतर-राज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की संलिप्तता भी शामिल है। इधर, ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि आधी रात को 25-30 लोग अचानक पीछे के रास्ते से घुस आए। सबके हाथों में हथियार थे। हमारे पास बचाव के लिए सिर्फ एक लाठी थी, टॉर्च तक नहीं। उन्होंने घेरकर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद बदमाश किले की ओपन कचहरी तक पहुंचे, जहां सिंधिया काल की 14 तोपें रखी थीं। उनमें से एक को उठाकर ले गए। अगले दिन सुबह उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दी। हैरानी की बात यह है कि चोरों ने इस वारदात का ट्रायल 12 दिन पहले ही कर लिया था, लेकिन प्रशासन सोता रहा। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पांच जुलाई को बदमाश पहली बार आए थे। उन्होंने एक तोप को जगह से हिलाकर नीचे गिरा दिया, लेकिन वजन ज्यादा होने से उसे ले नहीं जा सके। इसके बाद वे 15-16 जुलाई की रात पूरी तैयारी के साथ पहुंचे लोडिंग वाहन में तोप लेकर फरार हो गए। राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने भी किले का दौरा करने की बात कही है। उनका कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। सुरक्षा का आकलन कर तोप की बरामदगी के लिए पुलिस पर दबाव बनाया जाएगा। नरवर किला कभी अजेय माना जाता था। वह इस ऐतिहासिक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए नरवर किले का दौरा करेंगे। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक ये तोपें सिर्फ लोहे के टुकड़े नहीं हैं। ये पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु के मिश्रण से बनी हैं। इन पर फारसी और देवनागरी में राजचिह्न उकेरे हुए हैं। आधिकारिक तौर पर इनका कोई मोल नहीं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय काला बाजार में 16वीं सदी की ऐसी तोप 2 से 5 करोड़ रुपये तक में बिकती है। लंदन-न्यूयॉर्क के अवैध नीलामी घरों में इनकी भारी मांग है। इसी वजह से पुलिस अब किसी अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह के जुड़े होने की आशंका जता रही है।

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